sugam vigyan class 8 chapter 1 question answer:फसल उत्पादन एवं प्रबंधन

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sugam vigyan class 8 chapter 1 question answer:फसल उत्पादन एवं प्रबंधन

 

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sugam vigyan class 8 chapter 1 question answer

फसल उत्पादन एवं प्रबंधन

 

sugam vigyan class 8 chapter 1 question answer:अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

1. पौधों को स्वपोषी क्यों कहा जाता है?

उत्तर:-हरे पौधे अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। इस कारण इन्हें स्वपोषी (autotroph) कहा जाता है।

2. किन्हीं तीन दलहन फसलों के नाम लिखें।

उत्तर:-तीन दलहन फसल निम्न है। :- (1) मूंग (ⅱ) उरद (ⅲ) मसूर

3. रंबी फसल को किस ऋतु में लगाया जाता है?

उत्तर:-रबी फसलों को शीतऋतु में लगाया जाता है।

4. किन्हीं तीन अपघटकों के नाम लिखें।

उत्तर:-तीन अपघटक इस प्रहार है तीन अपघटक इस प्रहार है (i) जीवाणु (ii) कवक (iii) प्रोटोजोआ

5. कल्टीवेटर का उपयोग क्यों किया जाता है?

उत्तर:-क्योंकि इस यंत्र के उपयोग से खेतों की जुताई में श्रम तथा समय दोनों की बचत होती है।

6. पुनः रोपण विधि से किन फसलों को लगाया जाता है

उत्तर:-पुनः रोपण विधि से धान, टमाटर, प्याज, मिर्च, बैंगन आदि उगाया जाता है।

7. राइजोबियम जीवाणु कहाँ पाए जाते हैं?

उत्तर:-राइजोबियम फलीदार फसल के जड़ों पर स्थित ग्रंथियाँ में पाई जाती है।

8. ह्यूमस क्या है?

उत्तर:-ह्यूमस भूरे-काले रंग का पदार्थ है, जो जैव पदार्थों के गलने-सड़ने से बनता है।

9. किन्हीं तीन खरपतवारों के नाम लिखें।

उत्तर:-तीन खरपतवार निम्न है। (i) कंटैला (ⅱ) खट्टी-बूटी (iii) बथुआ

10. फलों तथा सब्जियों का भंडारण कहाँ किया जाता है?

उत्तर:-फलों तथा सब्जियों का भंडारण शीतागार (cold storage) में किया जाता है।

sugam vigyan class 8 chapter 1 question answer:लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. हमें भोजन की आवश्यकता क्यों होती है?

उत्तर:-भोजन से हमें ऊर्जा प्राप्त होती है। ऊर्जा की आवश्यकता जीवों की जैविक क्रियाओं, जैसे पाचन, श्वसन, उत्सर्जन आदि के संचालन में पड़ती है। भोजन से हमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, खनिज, विटामिन तथा जल की प्राप्ति होती है। इसीलिए भोजन की आवश्यकता होती है

2 अलग-अलग फसल को अलग-अलग मौसम में क्यों लगाया जाता है?

उत्तर:-अलग-अलग फसलों की खेती के लिए अलग-अलग जलवायु-संबंधी परिस्थितियों की आवश्यकता होती है। ये परिस्थितियाँ भिन्न-भिन्न मौसम में प्राप्त होती हैं। इसीलिए अलग-अलग फसल को अलग-अलग मौसम में उगाया जाता है

3 खरीफ फसल तथा रबी फसल में अंतर बताएँ।

उत्तर:- खरीफ फसल तथा रबी फसल में निम्नलिखित अंतर
खरीफ फसल
i. इन फसलों को वर्षा ऋतु में बोया जाता है
ii. इनकी इनकी बुवाई जून-जुलाई में तथा कटाई अक्टूबर से सितंबर तक होती है
iii. खरीफ फसल के अंतर्गत धान, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली कपास आदि आते हैं
रबी फसल
i. इन फसलों को शीत ऋतु मे लगाया जाता है
ii. इन की बुवाई अक्टूबर माह में तथा फसल की कटाई मार्च में होती है
iii. रवि फसल के अंतर्गत गेहूं, चना, मटर, सरसों, आलू, अलसी आदि आते हैं

4. बीजारोपण के पूर्व खेतों की जुताई क्यों आवश्यक है?

उत्तर:-जुताई से पोषक तत्व मिट्टी की ऊपरी परत में आ जाते हैं। इसके अलावा मिट्टी के कणों के बीच वायु संचरण तथा जल धारण क्षमता भी बढ़ जाती है। विभिन्न प्रकार के खरपतवार भी जुताई के दौरान जड़ से उखड़ जाते हैं। इसीलिए बीजारोपण के पूर्व खेतों की जुताई आवश्यक है

5. उर्वरक तथा खाद में अंतर बताएँ।

उत्तरः- उर्वरक तथा खाद में निम्नलिखित अंतर उर्वरक उर्वरक अकार्बनिक रसायनिक पदार्थ होते हैं जिनका निर्माण फैक्ट्रियों में होता है। उर्वरक का प्रयोग खेतों में प्रायः फसल की बुआई के बाद किया जाता है। उर्वरक में पादप पोषक तत्त्व, जैसे नाइट्रोजन, फॉस्फोरस तथा पोटैशियम प्रचुर मात्रा में होते हैं। खाद खाद कार्बनिक पदार्थ होते हैं जिनका निर्माण प्रकृति में पादप तथा जंतुओं के अपशिष्टों के अपघटन से होता है। खाद का प्रयोग खेतों में फसल की बुआई के पूर्व जुताई के दौरान किया जाता है। खाद में पादप पोषक तत्त्व उर्वरक से तुलनात्मक रूप में कम होते हैं।

6 फसल-चक्रण की परिभषा दें।

उत्तर:- खेतों की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए कोई दो फसलों के बीच एक. फलीदार फसल लगाने की पद्धति को फसल-चक्रण कहते हैं

7. सहजीवन क्या है?

उत्तर:- फलीदार फसल के जड़ों पर ग्रंथियां और ग्रंथियों में राइजोबियम नामक जीवाणु पाए जाते हैं। यह ग्रंथियों से अपना भोजन प्राप्त करते है।तथा उसी में वास स्थान बनाए रखते हैं इसके बदले में जीवाणु, वायुमंडल में उपस्थित नाइट्रोजन गैस का स्थिरीकरण कर इसे नाइट्रोजन के यौगिकों में परिणत कर देते हैं। जिससे मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि होती है इस प्रकार ग्रंथियों तथा राइजोबियम के बीच पाई जाने वाली लाभदायक साझेदारी को सहजीवन कहा जाता है
Or
सहजीवन दो प्राणियों में पारस्परिक, लाभजनक, आंतरिक साझेदारी है।

8. फसलों के लिए सिंचाई क्यों आवश्यक है?

उत्तर:- फसलों की उचित वृद्धि तथा विकास के साथ-साथ फसलों के समस्त जैविक क्रियाओं जैसे बीजों का अंकुरण प्रकाश संश्लेषण अवशोषण, रसारोहण, वाष्पोत्सर्जन आदि के लिए सिंचाई की आवश्यकता होती है

9. सिंचाई के पारंपरिक तरीकों को बताएँ।

उत्तर:- सिंचाई के परंपरागत तरीकों जैसे हिरनी कोमा चेन पंप , ढेकली, रहट द्वारा खेतों में जल उपलब्ध कराया जाता है। इन परंपरिक तरीकों में पालतू जानवरों तथा मजदूरों का उपयोग किया जाता है।

10. खरपतवार नियंत्रण क्यों आवश्यक है?

उत्तर:- खरपतवार वैसे अवांछित पौधे को कहा जाता है ज़ो खेतों में फसलों के साथ-साथ स्वता उग जाते हैं। यह फसलों को उपलब्ध होने वाले पोषक तत्व, जल, सूर्य का प्रकाश, स्थान आदि का उपयोग करते हैं। जिसका प्रतिकूल प्रभाव फसलों की पैदावार पर पड़ता है इसीलिए खरपतवार का नियंत्रण आवश्यक है

11. अनाजों का भंडारण क्यों आवश्यक है?

उत्तर:-अनाजों या अन्य भोजन उत्पादों का भविष्य में उपभोग के लिए भंडारण आवश्यक है हमारे देश में अनाजों के भंडारण की व्यवस्था ‘भारतीय खाद्य निगम ( Food corporation of India,FCI) करता है

12. पशुओं से प्राप्त होनेवाले भोज्य पदार्थ के नाम लिखें।

उत्तरः-पौधों की तरह ही जंतु भी हमें विभिन्न प्रकार के खाद पदार्थ प्रदान करते हैं जैसे दूध, मीट, अंडा, शहद आदि

sugam vigyan class 8 chapter 1 question answer:दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

 

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. फसल किसे कहते हैं? इसके विभिन्न प्रकारों का वर्णन करें।

उत्तर:- भोजन की प्राप्ति के लिए एक ही प्रकार के पौधे को किसी स्थान पर बड़े पैमाने पर उगाया जाता है। उसे फसल कहते है फसल तीन प्रकार के होते हैं
i खरीफ फसल :- इन फसलों को जून-जुलाई में बोया तथा अक्टूबर से दिसंबर मे कटा जाता है। जैसे:- धान, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली इत्यादि
ii. रबी फसल :- इन फसलों को शीत ऋतु के अक्टूबर माह ·में बोया तथा मार्च में कटा जाता है जैसे:-गेहूं, चना, मटर, सरसों आदि
iii. ग्रीष्म फसल :- इन फसलों को ग्रीष्म ऋतु के मार्च से जून माह के बीच की जाती है। जिन स्थानों में सिंचाई की अच्छी व्यवस्था होती है वहां धान, मक्का, आलू भी ग्रीष्म फसल के रूप में लगाया जाता है। ग्रीष्म फसल को जायद फसल भी कहा जाता है

2. खेतों में मिट्टी की तैयारी किस प्रकार की जाती है?

उत्तर:- मिट्टी की तैयारी जुताई करके किया जाता है। जिसमें मिट्टी को उलट पलट तथा भुरभुरा किया जाता है। अगर खेत की मिट्टी काफी शुष्क है तथा कड़ी होती हैं तो जुताई से पहले पानी डाला जाता है जिससे हल चलने में सुविधा होती है। जुताई के बाद मिट्टी के ढेरों को पाटल की सहायता से तोड़कर समतल बनाया जाता है इस प्रकार मिट्टी की तैयारी की जानी है

3. खेतों की उर्वरक क्षमता में वृद्धि करने संबंधी विभिन्न तरीकों का वर्णन करें।

उत्तर:- खेतों की उर्वरा क्षमता में वृद्धि करने संबंधी विभिन्न तरीके इस प्रकार है
i. खेतों की उर्वरा क्षमता में वृद्धि के लिए किसान एक या अधिक मौसम के लिए खेतों को परती छोड़ देते हैं
ii. मिट्टी में पोषक तत्व को पुनः प्राप्ति के लिए कोई दो फसलों के बीच फलीदार फसल लगाया जाता है
iii. खेतों को उपजाऊ बनाने के लिए किसानों द्वारा उर्वरक तथा खाद का उपयोग किया जाता है

4.सिंचाई किसे कहते हैं? सिंचाई के विभिन्न तरीकों का वर्णन करें।

उत्तर:- फसलों को पानी उपलब्ध कराने की पद्धति को सिंचाई कहते हैं। सिंचाई कई तरीकों से किया जाता है जैसे गिरनी चेन पंप ढेकली राहट ये सब परंपरागत तरीके हैं जिसके द्वारा खेतों में जल उपलब्ध कराया जाता है इन तरीकों मेंपालतू जानवरों तथा मजदूरों का उपयोग किया जाता है। अब जल स्रोतों से पानी खींचने के लिए डीजल या विद्युत से चलने वाले यांत्रिक पंप का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा छिड़काव तंत्र तथा ड्रिप तंत्र का भी उपयोग किया जाता है जिससे जल की बर्बादी ना हो

5. फसल कटाई के विभिन्न चरणों का वर्णन करें।

उत्तर:- फसल की कटाई कई चरणों से होता है जैसे। फसल के तैयार हो जाने पर उसे काटा जाता है जिसे कटाई कहते हैं। कटाई के बाद एकत्रित फसल के अनाज के दोनों को अलग किया जाता है जिसे दौनी या श्रेशिंग कहते हैं। धौनी से प्राप्त अनाज में छिलका शामिलं रहता है इन छिलकों को दानों से अलग करते हैं जिसे ओसाई कहते हैं

6. अनाजों के भंडारण के विभिन्न तरीकों का वर्णन करें।

उत्तर:- अनाजों का भंडारण कई तरीकों से किया जाता है। किसान अपने अनाजों का भंडारण मिट्टी अथवा धातु के बने बर्तनों या भंडार में करते हैं। किसान जूट के बोरे में भी अनाज का भंडारण करते हैं। घर में अनाज का भंडारण प्राय: शुष्क डिब्बों या कनस्तर में भरकर किया जाता है। व्यापारिक स्तर पर अनाजों को जूट के बोरों में भरकर गोदाम में रखा जाता है। बड़े पैमाने पर अनाजों का भंडारण साइलो भंडारों में किया जाता है

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